अकोला – पैगंबर मोहम्मद (स.) की गुस्ताखी के विरोध में दिनांक २८ नवंबर २०११ को नुमाइंदा काउंसिल के आवाहन पर अकोला शहर में पूर्ण बंद का माहौल बना था। परिस्थितियाँ बिगड़ते ही प्रशासन ने शहर में कर्फ्यू लागू किया था। इसी दौरान दर्ज हुए एक महत्वपूर्ण मामले में खदान पुलिस स्टेशन ने ३४ लोगों पर भारतीय दंड संहिता और बॉम्बे पुलिस अधिनियम की कई गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था। लगभग १४ वर्ष तक अदालत में चले इस मुक़दमे में आज एक बड़ा फैसला आया है। न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
खदान पुलिस ने जिन धाराओं में मामला दर्ज किया था, वे इस प्रकार हैं, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ: १४७, १४८, १४९, ३०७, ३९७, ५०४, ५०६, ४२७, ५०६ (b), १२०(b) बॉम्बे पुलिस अधिनियमः धारा १३५ ये धाराएँ गंभीर दंगाई गतिविधियों, हत्या की
कोशिश, गुंडागर्दी, तोड़फोड़ और धमकी जैसी गंभीर श्रेणी के अपराधों में गिनी जाती हैं इन सभी मामलो से आखीर आरोपीयों को दोषमुक्त कर दिया गया।
इस फैसले ने कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों को बड़ी राहत दी है। दोषमुक्त होने वालों में शामिल हैं। जिसमे अकोला पश्चिम के विधायक साजीद खान पठान, हाजी सज्जाद हुसेन इब्राहीम खान (टाटा), पूर्व
नगरसेवक अब्दुल रहीम पेंटर, मोहम्मद इरफान, जकाउल हक (डब्बू सेठ), शेख इब्राहिम गवली, मोहम्मद रफीक कुरेशी, जमीर भाई बर्तन वाले, शेख फाज़ील उर्फ फज़लु पहेलवान, प्राध्यापक सरफराज़ नवाज़ खान, मुफ्ती अशफाक कासमी, अब्दुल वहाब तथा अन्य कई लोग।
चार आरोपियों की बीच में ही मृत्यु हो गई। लंबे समय से चल रहे मुकदमे के दौरान चार आरोपियों का निधन हो गया। इनमें शामिल हैं माजी नगरपालिका उपाध्यक्ष नासिरोद्दीन सूफी, मुबीनुर्रहमान चौधरी कुरेशी, अब्दुल करीम कुरेशी, अनसार भाई का समावेश है। १४ साल पुराने इस मामले में फैसला आने के बाद आरोपियों के परिवारों में राहत और खुशी का माहौल है। न्यायालय के निर्णय को कई सामाजिक संगठनों ने ‘न्याय की जीत’ बताया है। उक्त मामले को लेकर पैरवी आरंभ में अधिवक्ता इरशाद खान, अधिवक्ता मोहम्मद आदिल, अधिवक्ता मुज़म्मिल, अधिवक्ता अनवर ज़ैन, अधिवक्ता शेख अज़ीम ने की।
