अकोला के शैक्षणिक नक्शे पर आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। अकोला गुजराती समाज द्वारा बाभूळगाव में तैयार किया गया डेक्सन ITI विद्यालय शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। बीते कई वर्षों से अकोला में अच्छे ITI विकल्पों की कमी की चर्चा होती रही है। अब इस नई संस्था के उद्घाटन के साथ जिले के युवाओं के सामने रोजगार और कौशल विकास का एक ठोस रास्ता खुल रहा है।
यह खबर सिर्फ एक उद्घाटन समारोह की सूचना नहीं है—यह उन छात्रों की उम्मीद है जो कौशल के सहारे भविष्य बनाना चाहते हैं। Akola News के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि यह शहर की शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय से महसूस की जा रही कमी को पूरा करता दिख रहा है।
छह एकड़ में फैला आधुनिक ITI कैंपस
बाभूळगाव रोड पर शिवाजी इंजीनियरिंग कॉलेज के पास तैयार यह ITI परिसर कुल 6 एकड़ में फैला है। करीब 20,000 वर्ग फुट की विशाल और आधुनिक इमारत में नए उपकरण, प्रैक्टिकल लैब और वर्कशॉप स्थापित की गई हैं। संस्था का दावा है कि यह सुविधा अकोला में अब तक की सबसे आधुनिक ITI संरचनाओं में से एक है।
जिस शहर में कई छात्र पुणे, नागपुर या गुजरात की ओर ITI कोर्स करने जाते रहे हैं, वहीं अब अकोला में ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी ट्रेनिंग मिलना एक बड़ी राहत है।
चार प्रमुख कोर्स, रोजगार की गारंटी का दावा
इस ITI में शुरुआती चरण में चार उपयोगी कोर्स शुरू किए जा रहे हैं—
- वेल्डर (8वीं पास)
- सोलर टेक्निशियन (10वीं पास)
- इलेक्ट्रिशियन (10वीं पास)
- कंप्यूटर ऑपरेशन टेक्निशियन (10वीं पास)
संस्था का कहना है कि ये कोर्स बाज़ार की मांग को देखते हुए चुने गए हैं। खास बात यह कि सोलर टेक्नोलॉजी का कोर्स ऐसे समय में शुरू किया जा रहा है जब महाराष्ट्र में सोलर प्लांट और ग्रीन एनर्जी की मांग लगातार बढ़ रही है।
दानदाताओं के सहयोग से बना डेक्सन ITI
यह पूरा प्रोजेक्ट समाज के कई दानदाताओं के सहयोग से पूरा हुआ है। ITI का नाम स्व. सुरेशभाई देवकरण शाह की स्मृति में रखा गया है। उद्घाटन समारोह में उनके परिवार द्वारा पुतला अनावरण भी किया जाएगा। इसके साथ ही ‘सोनल एंड व्रज लाठीया ITI वर्कशॉप’ का उद्घाटन अमेरिका के दानदाता व्रजभाई अभेचंद लाठीया करेंगे।
एक ऐसे दौर में जब शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, समाज के सहयोग से तैयार की गई यह संस्था एक सामूहिक प्रयास का उदाहरण है—यह संदेश देती है कि शिक्षा सिर्फ दान नहीं, समाज की ज़िम्मेदारी है।
स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया को स्थानीय आधार
संस्था का दावा है कि यह ITI केंद्र सरकार के
मेक इन इंडिया,
स्किल इंडिया,
आत्मनिर्भर भारत
जैसे अभियानों को स्थानीय स्तर पर मजबूती देगा।
हर साल सैकड़ों छात्र इन कोर्सों को पूरा कर तुरंत रोजगार पा सकें, यही इसका लक्ष्य रखा गया है।
लेकिन बड़े दावों के बीच वह मूल प्रश्न भी खड़ा है—क्या यह ITI सच में उन युवाओं तक पहुँचेगा जो फीस, दूरी और सुविधाओं के अभाव में तकनीकी शिक्षा से दूर रहते आए हैं? उम्मीद है कि संस्था इस पहल को सिर्फ “उद्घाटन” तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे उन लोगों के लिए भी सुलभ बनाएगी जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत है।
अकोला के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह ITI?
जिले के कई युवा बिना कौशल के नौकरी खोजने मजबूर होते हैं
औद्योगिक क्षेत्र सीमित है, लेकिन तकनीकी कौशल होने पर शहर से बाहर भी अवसर खुलते हैं
सोलर, इलेक्ट्रिक और कंप्यूटर ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में तेज़ी से रोजगार बढ़ने वाले हैं
शहर में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आर्थिक कारणों से महंगे संस्थानों में प्रवेश नहीं ले पाते
इस दृष्टि से यह ITI अकोला के युवाओं के लिए एक नया मंच बन सकता है।
निष्कर्ष
Akola News के लिए यह विकास सिर्फ एक शैक्षणिक खबर नहीं, बल्कि बदलते अकोला की कहानी है। शहर के युवाओं के पास अब एक आधुनिक ITI है—जहाँ कौशल सीखकर वह अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं।
समाज की यह पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने छात्रों का जीवन यह वास्तव में बदल पाती है।
