🔷 उपद्रव की ज़मीन नहीं बनेगा अकोला
जब देश की निगाहें दिल्ली-मुंबई की सियासत पर टिकी थीं, तब अकोला की मिट्टी पर पुलिस ने एक ऐसी कार्यवाही को अंजाम दिया जो बताती है कि अपराधियों के लिए अब यहां कोई जगह नहीं। अकोला पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक, अपर अधीक्षक अभय डोंगरे, सहायक अधीक्षक अनमोल मित्तल, निरीक्षक शंकर शेलके और अजित जाधव के मार्गदर्शन में मूर्तिज़ापुर के तीन अपराधियों को अकोला, वाशिम और अमरावती जिलों से एक साल के लिए हद्दपार कर दिया गया है।
🔷 कौन हैं ये तीन ‘हद्दपार’ अपराधी?
- अजय उर्फ काल्या रमेश गावंडे – जबरन चोरी, अवैध शराब विक्री, हथियार रखना और हद उल्लंघन जैसे गंभीर मामलों में लिप्त था।
- निखील उर्फ सलमान रामा तायडे – महिलाओं पर हमले, पीछा करना, हथियार से धमकाना, अश्लील गालियां देने जैसे आरोपों में शामिल।
- ऋषिकेश बाळु कीर्दक – धारदार हथियारों से हमले, शांतिभंग, सार्वजनिक जगहों पर गालीगलौज, और सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का आरोप।
इन तीनों के खिलाफ महाराष्ट्र पोलीस अधिनियम की धाराएं १६ और ५६ के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तीन जिलों से निष्कासित किया गया।
🔷 अकोला पुलिस की सख्ती बनी मिसाल
यह कार्रवाई कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। पो. उपनिरीक्षक आशिष शिंदे, पोहेकॉ सुरेश पांडे और सचिन दांदळे जैसे ज़मीन से जुड़े पुलिसकर्मियों ने इसे अंजाम तक पहुंचाया। अकोला पुलिस के इस कदम से साफ है – अब अपराधियों को चेतावनी नहीं, कार्रवाई मिलेगी।
