जब देश के बड़े शहरों में कानून की परछाइयाँ भी ग़ायब लगती हैं, तब अकोला में पुलिस की परछाई अपराधियों के सिर पर मँडराने लगी है।
४ जुलाई २०२५, रात के अंधेरे में जब शहर चैन की नींद सो रहा था, तब अकोला पुलिस अपनी आंखों में नींद नहीं, बल्कि कसम खाए हुए आदेश लिए गश्त कर रही थी।
पोस्टे एमआयडीसी और बार्शीटाकळी थानों की हद में पुलिस ने जुगार के अड्डों पर छापा मारा और ८९,२३६ रुपए का मुद्देमाल जब्त किया। चार आरोपियों को धरदबोचा गया।
लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थी।
रात ७ से ११ बजे तक जिलेभर में २४ नाकाबंदी पॉइंट लगाए गए। कुल ९३७ वाहनों की जांच हुई, जिसमें से २२४ मामलों में कार्रवाई कर १,०७,४५० रुपए का दंड वसूला गया।

७९ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया, जो सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर कानून की धज्जियाँ उड़ा रहे थे। उन पर मुंबई पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
एक केस महाराष्ट्र दारूबंदी अधिनियम के तहत भी दर्ज किया गया।
इस पूरे अभियान की कमान खुद मा. पुलिस अधीक्षक अर्चित चांडक ने संभाली थी। उनका साफ संदेश था —
शहर की शांति में जो खलल डालेगा, उसके लिए अकोला पुलिस अब सिर्फ वर्दी नहीं, एक चेतावनी बनकर सामने आएगी।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ऐसे गैरकानूनी कामों से दूर रहें और किसी भी अनुचित गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष को दें।
क्योंकि जब कानून नींद में होता है, तब अपराध जागता है।
और जब पुलिस जाग जाए… तो अपराध को छिपने के लिए कोई अंधेरा नहीं बचता।
